उर्दू और हिन्दी के नामचीन शायर निदा फाजली का 8 फरवरी 2016 को दिल का दौरा पड़ने से मुंबई में निधन हो गया। अपने लेखन की अनूठी शैली से निदा फाजली काफी प्रसिद्ध हुए। अपनी शायरी के माध्यम से उन्होंने जीवन के विविध पहलुओं की हकीकत बयां की। वे हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रबल समर्थक थे। उनकी रचनाओं में साम्प्रदायिक सौहार्दता प्रकट होती रही है। निदा फाजली साहित्य अकादमी, पद्म श्री सम्मान से सम्मानित थे।
' सफलता सूत्र' में 'निदा फाजली' के लिखे कुछ अत्यंत लोकप्रिय व खुबसूरत गीत व गजल आपके लिए...
' सफलता सूत्र' में 'निदा फाजली' के लिखे कुछ अत्यंत लोकप्रिय व खुबसूरत गीत व गजल आपके लिए...
1.
कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता
कहीं जमीं तो कहीं आस्मां नहीं मिलता
बुझा सका है भला कौन वक्त के शोले
ये ऐसी आग है जिसमें धुआँ नहीं मिलता
तमाम शहर में ऐसा नहीं खुलूस न हो
जहाँ उम्मीद हो इसकी वहाँ नहीं मिलता
कहाँ चराग़ जलाएँ कहाँ गुलाब रखें
छतें तो मिलती हैं लेकिन मकाँ नहीं मिलता
ये क्या अज़ाब है सब अपने आप में गुम हैं
जुबाँ मिली है मगर हमजुबाँ नहीं मिलता
चराग़ जलते ही बिनाई बुझने लगती है
खुद अपने घर में ही घर का निशाँ नहीं मिलता।
कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता
कहीं जमीं तो कहीं आस्मां नहीं मिलता
बुझा सका है भला कौन वक्त के शोले
ये ऐसी आग है जिसमें धुआँ नहीं मिलता
तमाम शहर में ऐसा नहीं खुलूस न हो
जहाँ उम्मीद हो इसकी वहाँ नहीं मिलता
कहाँ चराग़ जलाएँ कहाँ गुलाब रखें
छतें तो मिलती हैं लेकिन मकाँ नहीं मिलता
ये क्या अज़ाब है सब अपने आप में गुम हैं
जुबाँ मिली है मगर हमजुबाँ नहीं मिलता
चराग़ जलते ही बिनाई बुझने लगती है
खुद अपने घर में ही घर का निशाँ नहीं मिलता।
2.
होश वालों को ख़बर क्या बेख़ुदी क्या चीज़ है
इश्क़ कीजे फिर समझिए जिंदगी क्या चीज़ है
उन से नज़रें क्या मिली रोशन फिजाएँ हो गईं
आज जाना प्यार की जादूगरी क्या चीज़ है
ख़ुलती ज़ुल्फ़ों ने सिखाई मौसमों को शायरी
झुकती आँखों ने बताया मयकशी क्या चीज़ है
हम लबों से कह न पाये उनसे हाल-ए-दिल कभी
और वो समझे नहीं ये ख़ामोशी क्या चीज़ है।
होश वालों को ख़बर क्या बेख़ुदी क्या चीज़ है
इश्क़ कीजे फिर समझिए जिंदगी क्या चीज़ है
उन से नज़रें क्या मिली रोशन फिजाएँ हो गईं
आज जाना प्यार की जादूगरी क्या चीज़ है
ख़ुलती ज़ुल्फ़ों ने सिखाई मौसमों को शायरी
झुकती आँखों ने बताया मयकशी क्या चीज़ है
हम लबों से कह न पाये उनसे हाल-ए-दिल कभी
और वो समझे नहीं ये ख़ामोशी क्या चीज़ है।
3.
हर तरफ़ हर जगह बेशुमार आदमी
फिर भी तनहाइयों का शिकार आदमी
सुबह से शाम तक बोझ ढोता हुआ
अपनी ही लाश का खुद मज़ार आदमी
हर तरफ़ भागते-दौड़ते रास्ते
हर तरफ़ आदमी का शिकार आदमी
रोज़ जीता हुआ रोज़ मरता हुआ
हर नये दिन, नया इन्तज़ार आदमी
ज़िन्दगी का मुकद्दर सफ़र-दर-सफ़र
आख़िरी साँस तक बेक़रार आदमी।
हर तरफ़ हर जगह बेशुमार आदमी
फिर भी तनहाइयों का शिकार आदमी
सुबह से शाम तक बोझ ढोता हुआ
अपनी ही लाश का खुद मज़ार आदमी
हर तरफ़ भागते-दौड़ते रास्ते
हर तरफ़ आदमी का शिकार आदमी
रोज़ जीता हुआ रोज़ मरता हुआ
हर नये दिन, नया इन्तज़ार आदमी
ज़िन्दगी का मुकद्दर सफ़र-दर-सफ़र
आख़िरी साँस तक बेक़रार आदमी।
4.
तू इस तरह से मेरी जिंदगी में शामिल है
जहाँ भी जाऊं ये लगता है तेरी महफ़िल है
ये आसमान, ये बादल, ये रास्ते, ये हवा
हर एक चीज़ है अपनी जगह ठिकाने से
कई दिनों से शिकायत नहीं जमाने से
ये जिंदगी है सफ़र, तू सफ़र की मंज़िल है
हर एक फूल किसी याद सा महकता है
तेरे ख़याल से जागी हुई फिजायें है
ये सब्ज़ पेड़ है, या प्यार की दुआएं हैं
तू पास हो के नहीं फिर भी तू मुक़ाबिल है
हर एक शै है मोहब्बत के नूर से रोशन
ये रोशनी जो ना हो, जिंदगी अधूरी है
राह-ए-वफ़ा में, कोई हमसफ़र ज़रूरी है
ये रास्ता कही तनहा कटे तो मुश्किल है।
तू इस तरह से मेरी जिंदगी में शामिल है
जहाँ भी जाऊं ये लगता है तेरी महफ़िल है
ये आसमान, ये बादल, ये रास्ते, ये हवा
हर एक चीज़ है अपनी जगह ठिकाने से
कई दिनों से शिकायत नहीं जमाने से
ये जिंदगी है सफ़र, तू सफ़र की मंज़िल है
हर एक फूल किसी याद सा महकता है
तेरे ख़याल से जागी हुई फिजायें है
ये सब्ज़ पेड़ है, या प्यार की दुआएं हैं
तू पास हो के नहीं फिर भी तू मुक़ाबिल है
हर एक शै है मोहब्बत के नूर से रोशन
ये रोशनी जो ना हो, जिंदगी अधूरी है
राह-ए-वफ़ा में, कोई हमसफ़र ज़रूरी है
ये रास्ता कही तनहा कटे तो मुश्किल है।
5.
दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है
मिल जाये तो मिट्टी है खो जाये तो सोना है
अच्छा-सा कोई मौसम तन्हा-सा कोई आलम
हर वक़्त का रोना तो बेकार का रोना है
बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने
किस राह से बचना है किस छत को भिगोना है
ग़म हो कि ख़ुशी दोनों कुछ देर के साथी हैं
फिर रस्ता ही रस्ता है हँसना है न रोना है
ये वक्त जो तेरा है, ये वक्त जो मेरा
हर गाम पर पहरा है, फिर भी इसे खोना है
आवारा मिज़ाजी ने फैला दिया आंगन को
आकाश की चादर है धरती का बिछौना है।
दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है
मिल जाये तो मिट्टी है खो जाये तो सोना है
अच्छा-सा कोई मौसम तन्हा-सा कोई आलम
हर वक़्त का रोना तो बेकार का रोना है
बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने
किस राह से बचना है किस छत को भिगोना है
ग़म हो कि ख़ुशी दोनों कुछ देर के साथी हैं
फिर रस्ता ही रस्ता है हँसना है न रोना है
ये वक्त जो तेरा है, ये वक्त जो मेरा
हर गाम पर पहरा है, फिर भी इसे खोना है
आवारा मिज़ाजी ने फैला दिया आंगन को
आकाश की चादर है धरती का बिछौना है।

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