प्रेमराग : प्रेम पर मेरी दस कविता
1. प्रेम पंखुरी
1. प्रेम पंखुरी
" किसी फूल की
पंखुरी पर टिमटिमाते
ओस कण जैसा
होता है प्रेम...
जाने किस तपन से
उड़ जाए ये
वाष्प बन...
या
हल्की ठोकर पा
मिल जाए
मिट्टी में..."
पंखुरी पर टिमटिमाते
ओस कण जैसा
होता है प्रेम...
जाने किस तपन से
उड़ जाए ये
वाष्प बन...
या
हल्की ठोकर पा
मिल जाए
मिट्टी में..."
2. प्रेम पहेली
'प्रेम'
एक पहेली...
जिसने सुलझाया
व्यक्त न कर पाया...
जो उलझा
मौके ढूंढ़ते रहता है
व्यक्त करने के...
'प्रेम'
एक पहेली...
जिसने सुलझाया
व्यक्त न कर पाया...
जो उलझा
मौके ढूंढ़ते रहता है
व्यक्त करने के...
3. अँधा प्रेम
अँधा प्रेम
लोग कहते हैं...
'प्रेम अँधा होता है'
...लेकिन
प्रेम अंधा नहीं होता
क्योंकि
जहां प्रेम अंधा होता है
वहां
प्रेम नहीं होता...
अँधा प्रेम
लोग कहते हैं...
'प्रेम अँधा होता है'
...लेकिन
प्रेम अंधा नहीं होता
क्योंकि
जहां प्रेम अंधा होता है
वहां
प्रेम नहीं होता...
4. नजरिया
'प्रेम'
...अपने आप में
किसी और को
देख पाना...।
'प्रेम'
...अपने आप में
किसी और को
देख पाना...।
5. प्रेम की कीमत
बेच देना
अपना संपूर्ण जीवन
नि:शुल्क।
बेच देना
अपना संपूर्ण जीवन
नि:शुल्क।
6. प्रेम पीत
प्रेम...
बसंत की
नर्म पीली धूप
और
ढ़ेर सी
पीली तितलियों का
रंग लेकर
अदृश्य बयार में
पीलापन भरना...।
प्रेम...
बसंत की
नर्म पीली धूप
और
ढ़ेर सी
पीली तितलियों का
रंग लेकर
अदृश्य बयार में
पीलापन भरना...।
7. प्रेम की भाषा
" सुबह की लालिमा
सीखती है
हर रोज
ढ़ेर सारी भाषाएं
राजनीति की
प्रेम की
ज्ञान की
विज्ञान की...
दोपहरी तक
हो जाती है वो
पारंगत
हर भाषा में...
लेकिन
शाम तक
वो भूल जाती है
हर भाषा...
उसे तो याद रहता है
सिर्फ
प्रेम की भाषा
और उसकी
लालिमा...।"
" सुबह की लालिमा
सीखती है
हर रोज
ढ़ेर सारी भाषाएं
राजनीति की
प्रेम की
ज्ञान की
विज्ञान की...
दोपहरी तक
हो जाती है वो
पारंगत
हर भाषा में...
लेकिन
शाम तक
वो भूल जाती है
हर भाषा...
उसे तो याद रहता है
सिर्फ
प्रेम की भाषा
और उसकी
लालिमा...।"
8. मिट्टी
प्रेम...
मिट्टी का
मिट्टी को
पाने के लिए
जद्दोजहद...
आखिर
मिट्टी का
मिट्टी में मिल जाना...।
प्रेम...
मिट्टी का
मिट्टी को
पाने के लिए
जद्दोजहद...
आखिर
मिट्टी का
मिट्टी में मिल जाना...।
9. प्रेम सुवास
यादों के झरोखों से
कुछ चिर-परिचित
खुशबुओं का आना
और
महका जाना
हृदय के
उस कोने को
जहां
अतीत के फूल
हमेशा ताजा
रहते हैं...।
यादों के झरोखों से
कुछ चिर-परिचित
खुशबुओं का आना
और
महका जाना
हृदय के
उस कोने को
जहां
अतीत के फूल
हमेशा ताजा
रहते हैं...।
10. प्रेमानुभूति
प्रेम...
मंदाकिनी से उतरती
रोशनी के निर्झर में
सवार...
हजारों आकाशगंगाओं की
दूरी तय कर
जीवन के बीज को
अंकुरित कर
सौंप देना
एक अनुभूति को
पीढ़ी दर पीढ़ी
अंतहीन समय के लिए...।
प्रेम...
मंदाकिनी से उतरती
रोशनी के निर्झर में
सवार...
हजारों आकाशगंगाओं की
दूरी तय कर
जीवन के बीज को
अंकुरित कर
सौंप देना
एक अनुभूति को
पीढ़ी दर पीढ़ी
अंतहीन समय के लिए...।


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