क्यों चटकती है हड्डियाँ ?
क्यों चटकती है हड्डियाँ ?
कसरत करने के दौरान या अंगड़ाई लेते समय कई बार हड्डियों के जोड़ों के चटकने की आवाज आती है, इसके अलावा कुछ लोगों को उंगलियाँ चटकाने की भी आदत होती है। आइए जाने हड्डियों के चटकने पर आवाज क्यों आती है।
दरअसल हड्डियों के जोड़ों के चटकने के दो अलग-अलग कारण हैं। जब उंगलियाँ चटकाई जाती है, तब वे लगभग अपनी सीमा तक मोड़ दी जाती है। उंगलियों के जोड़ के आसपास द्रव पदार्थ भरा होता है, जिसमें वायु मिश्रित होती है। जब हम जाने-अनजाने में उंगलियाँ चटकाते हैं तो यह वायु बुलबुलों के रूप में द्रव पदार्थ से अलग होती है। इन्हीं बुलबुलों के कारण आवाज पैदा होती है, जिसे हम उंगलियाँ चटकना कहते हैं।
जब तक यह वायु दोबारा द्रव पदार्थ में घुलमिल नहीं जाती, तब तक फिर से उंगलियाँ चटकाने पर आवाज नहीं आ सकती। दूसरी ओर शरीर को ऐंठने, मोड़ने या अंगड़ाई लेने से हड्डियों के चटकने की आवाज आती है उसका कारण वे ऊतक हैं, जो मांसपेशियों और हड्डियों के बीच में रहते हैं। जब इन पर तनाव पड़ता है तो ये अपने स्थान से हट जाते हैं और इसी कारण से आवाज पैदा होती है, जिसे हम हड्डियाँ चटकना कहते हैं। इसकी पुनरावृत्ति का कोई निश्चित समय नहीं होता है, अर्थात कुछ लोगों में यह उसी समय दोबारा भी हो सकता है, कुछ के साथ नहीं भी हो सकता है।
उँगलियाँ चटकाते हैं तो हो जाएँ सावधान
अक्सर कुछ लोग खाली बैठे बैठे या काम में लगे होने के बाद भी उंगलियों को चटकाते रहते हैं या गर्दन घुमाकर चटकाते हैं। लेकिन जरूरत से ज्यादा ऐसा करना काफी नुकसानदायक होता है। इससे गठिया (arthritis) रोग होने की आशंका बढ़ जाती है। बार-बार उंगलियां चटकाने से जोड़ों के बीच का द्रव कम हो जाता है, जिससे जोड़ों की पकड़ कमजोर होने लगती है। साथ ही हड्डियों के जोड़ पर मौजूद ऊतक भी नष्ट हो जाते हैं, जो गठिया रोग का कारण बन सकता है।
➤ उमेश कुमार
दोस्तों 'सफलता सूत्र ' के हमारे यूट्यूब चैनेल 'सफलता सूत्र ' पर उक्त लेख संबंधित ज्ञानवर्धक विडियो अवश्य देखें :-
https://www.youtube.com/watch?v=TXKxGu71ppw
दरअसल हड्डियों के जोड़ों के चटकने के दो अलग-अलग कारण हैं। जब उंगलियाँ चटकाई जाती है, तब वे लगभग अपनी सीमा तक मोड़ दी जाती है। उंगलियों के जोड़ के आसपास द्रव पदार्थ भरा होता है, जिसमें वायु मिश्रित होती है। जब हम जाने-अनजाने में उंगलियाँ चटकाते हैं तो यह वायु बुलबुलों के रूप में द्रव पदार्थ से अलग होती है। इन्हीं बुलबुलों के कारण आवाज पैदा होती है, जिसे हम उंगलियाँ चटकना कहते हैं।
जब तक यह वायु दोबारा द्रव पदार्थ में घुलमिल नहीं जाती, तब तक फिर से उंगलियाँ चटकाने पर आवाज नहीं आ सकती। दूसरी ओर शरीर को ऐंठने, मोड़ने या अंगड़ाई लेने से हड्डियों के चटकने की आवाज आती है उसका कारण वे ऊतक हैं, जो मांसपेशियों और हड्डियों के बीच में रहते हैं। जब इन पर तनाव पड़ता है तो ये अपने स्थान से हट जाते हैं और इसी कारण से आवाज पैदा होती है, जिसे हम हड्डियाँ चटकना कहते हैं। इसकी पुनरावृत्ति का कोई निश्चित समय नहीं होता है, अर्थात कुछ लोगों में यह उसी समय दोबारा भी हो सकता है, कुछ के साथ नहीं भी हो सकता है।
उँगलियाँ चटकाते हैं तो हो जाएँ सावधान
अक्सर कुछ लोग खाली बैठे बैठे या काम में लगे होने के बाद भी उंगलियों को चटकाते रहते हैं या गर्दन घुमाकर चटकाते हैं। लेकिन जरूरत से ज्यादा ऐसा करना काफी नुकसानदायक होता है। इससे गठिया (arthritis) रोग होने की आशंका बढ़ जाती है। बार-बार उंगलियां चटकाने से जोड़ों के बीच का द्रव कम हो जाता है, जिससे जोड़ों की पकड़ कमजोर होने लगती है। साथ ही हड्डियों के जोड़ पर मौजूद ऊतक भी नष्ट हो जाते हैं, जो गठिया रोग का कारण बन सकता है।
➤ उमेश कुमार
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