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पर्व विशेष : क्रिसमस (25 दिसंबर) के अवसर पर
Cristmas Day Celebration (25 December) 
क्रिसमस की धूम सर्वत्र  


                                              क्रिसमस ईसाईयों का सबसे बड़ा त्यौहार है। यह ईसा मसीह के जन्म का उत्सव है, जो प्रतिवर्ष 25 दिसंबर को मनाया जाता है। लगभग दो हजार साल पहले इसी दिन ईसा मसीह का जन्म हुआ था। ईसा का जन्मदिन मनाने का प्रारंभ उसकी मौत के बाद करीब सन चार सौ से शुरू हुई थी। क्रिसमस का अर्थ होता है ईसा मसीह की प्रार्थना-सभा।
इस तरह हुआ यीशु का जन्म 
                                             प्रभु ईसा मसीह का जन्म येरुशलम के पास बेथलेहम (इजराइल) में एक गौशाला में हुआ था। नाजरथ नामक एक शहर में परमेश्वर का भेजा देवदूत मरियम नाम की कुंवारी लड़की के पास पहुंचा और उसे प्रभु यीशु के धरती पर अवतरण की सूचना दी। दैवीय आज्ञा के अनुसार मरियम को गर्भवती होना था और अपने मंगेतर जोजफ (यूसुफ) के साथ भागकर बेथलेहम जाना था उन दिनों इजरायल पर अत्याचारी रोमनों का राज था। दैवीय आज्ञा से अवगत रोमन सम्राट राज्य में जन्में हर नवजात शिशु की हत्या पर उतारू था। लिहाजा मरियम अपनी कोख में पल रहे शिशु को लेकर बेथलेहम पहुंची, पर वहां भी कहीं आश्रय न मिलने की वजह से विवश होकर उन्हें एक गौशाला में शरण लेनी पड़ी और प्रभु यीशु का जन्म हुआ।
क्रिसमस की धूम सर्वत्र 
                                               क्रिसमस का उल्लास इसे मनाने वालों के चेहरे पर तो झलकता ही है, साथ ही उतना ही उत्साह इस पवित्र धार्मिक पर्व को मनाने के तौर-तरीकों में नजर आता है। घरों की आकर्षक सजावट, क्रिसमस ट्री और रोशनी में जगमगाता सितारा, जो कि सभी को प्रभु ईसा मसीह के उपदेशों पर चलने की प्रेरणा देती है। क्रिसमस की पूर्व रात्रि यानी 24 दिसंबर को रात साढ़े दस बजे से चर्च में विशेष प्रार्थना व कैरल्स का आयोजन होने लगता है। फिर क्रिसमस मास (विशेष प्रार्थना) व मिडनाइट मास होता है। इसके बाद चर्च के फादर श्रद्धालुओं को प्रसाद देते हैं। प्रार्थना सभा के बाद सभी एक दूसरे को बधाईयां देते हैं। दूसरे दिन सुबह लोग अपने रिश्तेदारों, परिचितों को क्रिसमस केक व मिठाइयां खिलाते हैं। उपहारों का आदान-प्रदान होता है। आतिशबाजी की जाती है और बच्चों को सांता क्लॉज़ ढ़ेर सारे उपहार बांटते हैं।
-- उमेश कुमार साहू

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