गर्मियां प्रारंभ हो चुकी है और पेयजल के लिए त्राहि-त्राहि भी। पानी की महत्ता किसी से छुपी नहीं है। आज धरती पर जीवन है तो पानी की वजह से। लेकिन आज इसी पानी के लिए लोग लड़ते नजर आते हैं, कारण दिनोंदिन घटता शुद्ध पानी का स्तर।
वर्तमान में पानी के गिरते स्तर के लिए जिम्मेदार कौन है, चाहे वह जल प्रदूषण के रुप में हो या पानी की बर्बादी के रुप में हो? उत्तर है हम खुद! एक तरफ तो हम पानी का रोना रोते हैं वहीं दूसरी तरफ इसे बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ते।आज उद्योग धंधो, कारखानों व अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से निकलने वाले अपशिस्ट पदार्थों ने हमारी नदियों व अन्य जल स्रोतों का बुरा हाल कर दिया है।
नदियां आंसू बहा रही है, इनका दर्द समझने वाला कोई भी नहीं। कभी कोई प्रयास करता भी है तो सिर्फ कागजों तक।प्रदूषित जल मानव समाज पर कहर बनकर टूट रहा है। हर साल लाखों लोग जलजनित रोगों के कारण काल के गाल में समा जाते है, और जो जिंदा बच जाते हैं उनकी स्थिति बड़ी दयनीय हो जाती है। प्रदूषित जल के सेवन से तरह तरह की बीमारियां सामने आ रही है। कैंसर, त्वचा संबंधी तकलीफें दिनोंदिन बढती ही जा रही है।
आज जल दिवस के अवसर पर हम सभी को गंभीरता से सोचना होगा, जल की दुर्दशा का जिम्मेदार कौन? सवाल का जवाब हम सभी के पास है। आइये संकल्प लें अपने दैनिक कार्यों से लेकर सामाजिक कार्यों में होने वाले पानी की बर्बादी रोकें। जल को नुकसान पहुँचाने वाला ऐसा कोई भी काम न करें जिससे आने वाली पीढ़ी हमें घृणा की नजरों से देखें।
याद रखें "जल ही जीवन का दूसरा रुप है।"
वर्तमान में पानी के गिरते स्तर के लिए जिम्मेदार कौन है, चाहे वह जल प्रदूषण के रुप में हो या पानी की बर्बादी के रुप में हो? उत्तर है हम खुद! एक तरफ तो हम पानी का रोना रोते हैं वहीं दूसरी तरफ इसे बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ते।आज उद्योग धंधो, कारखानों व अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से निकलने वाले अपशिस्ट पदार्थों ने हमारी नदियों व अन्य जल स्रोतों का बुरा हाल कर दिया है।
नदियां आंसू बहा रही है, इनका दर्द समझने वाला कोई भी नहीं। कभी कोई प्रयास करता भी है तो सिर्फ कागजों तक।प्रदूषित जल मानव समाज पर कहर बनकर टूट रहा है। हर साल लाखों लोग जलजनित रोगों के कारण काल के गाल में समा जाते है, और जो जिंदा बच जाते हैं उनकी स्थिति बड़ी दयनीय हो जाती है। प्रदूषित जल के सेवन से तरह तरह की बीमारियां सामने आ रही है। कैंसर, त्वचा संबंधी तकलीफें दिनोंदिन बढती ही जा रही है।
आज जल दिवस के अवसर पर हम सभी को गंभीरता से सोचना होगा, जल की दुर्दशा का जिम्मेदार कौन? सवाल का जवाब हम सभी के पास है। आइये संकल्प लें अपने दैनिक कार्यों से लेकर सामाजिक कार्यों में होने वाले पानी की बर्बादी रोकें। जल को नुकसान पहुँचाने वाला ऐसा कोई भी काम न करें जिससे आने वाली पीढ़ी हमें घृणा की नजरों से देखें।
याद रखें "जल ही जीवन का दूसरा रुप है।"
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