HOLI ARTICLE IN HINDI
रंग में पड़ जाये न भंग
बच्चों से लेकर बड़ों सभी को होली की बेसब्री से प्रतीक्षा रहती है। हो भी क्यों ये पर्व ही ऐसा है, रंग-बिरंगा, आनंदित और उत्साहित करने वाला। जीवन में नये रंग भरने वाला। लेकिन होली के ये रंग कभी-कभी परेशानी का सबब भी बन जाते हैं।
घातक हैं ये रंग-बिरंगे रंग
होली के मौके पर लगाये जाने वाले रंगों में 70% तक मिलावट होती है।
इन मिलावटी रंगों से आँखों में जलन व कम दिखाई देना, त्वचा में सूखापन, सिरदर्द व रक्त विषाक्तता आदि का खतरा रहता है।
बच्चों और महिलाओं की त्वचा ज्यादा संवेदनशील होने के कारण उनके लिए ये रंग और भी खतरनाक होते हैं। कानों में रंग चले जाने पर श्रवण शक्ति को हानि पहुंच सकती है।
आंखों पर भी विभिन्न प्रकार के रंग तात्कालिक या स्थाई विकृति पैदा कर सकते हैं।
कुछ रंग कैंसर कारक भी होते हैं।
उड़ते गुलाल संग उडती बीमारियां
होली के दिन अत्यधिक मात्रा में उड़ाया जाने वाला गुलाल भी बहुत खतरनाक है।
गुलाल बनाने में एसिड स्कार्लेट, रोकामाइन व पोटेशियम डाई क्रामेट प्रयुक्त किया जाता है।
उड़ते गुलाल से नाक व सांस की तकलीफ, ब्रोंकाइटिस, अस्थमा आदि की समस्या बढ़ जाती है।
होली का पर्व आनंद व उमंग का पर्व बना रहे इसके लिए आवश्यकता है सिंथेटिक रंग,पेंट,ग्रीस, कोलतार, वार्निश,कीचड़ आदि का प्रयोग नहीं करें।
प्राकृतिक रंगों को प्राथमिकता दें।
रंग में पड़ जाये न भंग
बच्चों से लेकर बड़ों सभी को होली की बेसब्री से प्रतीक्षा रहती है। हो भी क्यों ये पर्व ही ऐसा है, रंग-बिरंगा, आनंदित और उत्साहित करने वाला। जीवन में नये रंग भरने वाला। लेकिन होली के ये रंग कभी-कभी परेशानी का सबब भी बन जाते हैं।
घातक हैं ये रंग-बिरंगे रंग
होली के मौके पर लगाये जाने वाले रंगों में 70% तक मिलावट होती है।
इन मिलावटी रंगों से आँखों में जलन व कम दिखाई देना, त्वचा में सूखापन, सिरदर्द व रक्त विषाक्तता आदि का खतरा रहता है।
बच्चों और महिलाओं की त्वचा ज्यादा संवेदनशील होने के कारण उनके लिए ये रंग और भी खतरनाक होते हैं। कानों में रंग चले जाने पर श्रवण शक्ति को हानि पहुंच सकती है।
आंखों पर भी विभिन्न प्रकार के रंग तात्कालिक या स्थाई विकृति पैदा कर सकते हैं।
कुछ रंग कैंसर कारक भी होते हैं।
उड़ते गुलाल संग उडती बीमारियां
होली के दिन अत्यधिक मात्रा में उड़ाया जाने वाला गुलाल भी बहुत खतरनाक है।
गुलाल बनाने में एसिड स्कार्लेट, रोकामाइन व पोटेशियम डाई क्रामेट प्रयुक्त किया जाता है।
उड़ते गुलाल से नाक व सांस की तकलीफ, ब्रोंकाइटिस, अस्थमा आदि की समस्या बढ़ जाती है।
होली का पर्व आनंद व उमंग का पर्व बना रहे इसके लिए आवश्यकता है सिंथेटिक रंग,पेंट,ग्रीस, कोलतार, वार्निश,कीचड़ आदि का प्रयोग नहीं करें।
प्राकृतिक रंगों को प्राथमिकता दें।

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