Best Collection of Heart Touching Shayari
Evergreen Hindi Shayari Collection
Evergreen Hindi Shayari Collection
शेरो-शायरी का अंदाज सचमुच निराला है। यह अंतरमन की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। शेरो-शायरी के माध्यम से शायर गागर में सागर भर देता है। दर्द, विरह, पीड़ा, तड़प, प्रेम, सौंदर्य, अध्यात्म, आनंद, जीवन क्या कुछ नहीं है शायरी में। जीवन के विविध रूपों को सहजता से पढ़ने व सुनने वालों के हृदय की गहराइयों तक पहुंचाने का सुगम रास्ता है शायरी।
आज मैंने आपके लिए उर्दू के लोकप्रिय शायरों की हजारों शेरों में से कुछ चुनिंदा हृदयस्पर्शी शेरों को संग्रहित किया है। ये शायरी 'देखन में छोटे लगे, घाव भरे गंभीर' कथन को चरितार्थ करते हैं। ये सभी ऐसे पुष्प हैं जो निश्चित रुप से आपके मन की बगिया को महका जाएंगी।
चुनिंदा हृदयस्पर्शी शेरो-शायरी संग्रह (हिन्दी/उर्दू)
न थी हाल की जब हमें अपनी खबर
रहे देखते औरों के ऐबो-हुनर
पड़ी अपनी बुराइयों पे जो नजर
तो निगाह में कोई बुरा न रहा
-- बहादुरशाह 'जफर'
आज मैंने आपके लिए उर्दू के लोकप्रिय शायरों की हजारों शेरों में से कुछ चुनिंदा हृदयस्पर्शी शेरों को संग्रहित किया है। ये शायरी 'देखन में छोटे लगे, घाव भरे गंभीर' कथन को चरितार्थ करते हैं। ये सभी ऐसे पुष्प हैं जो निश्चित रुप से आपके मन की बगिया को महका जाएंगी।
चुनिंदा हृदयस्पर्शी शेरो-शायरी संग्रह (हिन्दी/उर्दू)
रहे देखते औरों के ऐबो-हुनर
पड़ी अपनी बुराइयों पे जो नजर
तो निगाह में कोई बुरा न रहा
-- बहादुरशाह 'जफर'
है जान के साथ काम इन्सां के लिए।
बनती नहीं है जिंदगी में, बेकाम किये।
जीते हो तो कुछ कीजिए जिंदों की तरह
मुर्दों की तरह जिए तो क्या ख़ाक जिए।
-- हाली
बनती नहीं है जिंदगी में, बेकाम किये।
जीते हो तो कुछ कीजिए जिंदों की तरह
मुर्दों की तरह जिए तो क्या ख़ाक जिए।
-- हाली
जो दिल की है, वो बात नहीं होती
जो दिन न हो, वो रात नहीं होती
मिलते तो हैं अक्सर, जमाने से जोश
पर अपने आप से मुलाकात नहीं होती
-- जोश मलीहाबादी
जो दिन न हो, वो रात नहीं होती
मिलते तो हैं अक्सर, जमाने से जोश
पर अपने आप से मुलाकात नहीं होती
-- जोश मलीहाबादी
अब इत्र भी मलो तो मोहब्बत की बू नहीं
वो दिन हवा हुए कि जब पसीना गुलाब था
-- माधोराम 'जौहर'
वो दिन हवा हुए कि जब पसीना गुलाब था
-- माधोराम 'जौहर'
वो जमीं पे जिनका था दबदबा
कि बुलंद अर्श पे नाम था
उन्हें यूं फलक ने मिटा दिया
कि मजार तक का निशां नहीं
-- चकबस्त
कि बुलंद अर्श पे नाम था
उन्हें यूं फलक ने मिटा दिया
कि मजार तक का निशां नहीं
-- चकबस्त
मौत तो उसकी है, करे जिसका जमाना अफसोस।
यूं तो दुनिया में सभी आये हैं मरने के लिए।
-- 'महमूद' रामपुरी
यूं तो दुनिया में सभी आये हैं मरने के लिए।
-- 'महमूद' रामपुरी
जिंदगी के लिए हंसना भी जरूरी है मगर
दिल बुझा हो तो लतीफे अच्छे नहीं लगते
-- वाली आसी
दिल बुझा हो तो लतीफे अच्छे नहीं लगते
-- वाली आसी
जो चाहिए देखना, न देखा हमने
हर-शै-पे किया है गौर क्या हमने
औरों का समझना तो मुश्किल है
खुद क्या हैं इसी को कुछ न समझा हमने
-- शाद अजीमाबादी
हर-शै-पे किया है गौर क्या हमने
औरों का समझना तो मुश्किल है
खुद क्या हैं इसी को कुछ न समझा हमने
-- शाद अजीमाबादी
हम आह भी करते हैं तो हो जाते हैं बदनाम,
वो कत्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता।
-- अकबर इलाहाबादी
वो कत्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता।
-- अकबर इलाहाबादी
इंसान है इस दौर में कुछ इतना परेशां,
भगवान को भगवान के घर ढूंढ़ रहा है।
-- साजन पेशावरी
भगवान को भगवान के घर ढूंढ़ रहा है।
-- साजन पेशावरी
तुम पास नहीं हो तो अजब हाल है दिल का,
यूं जैसे मैं कुछ रख के कहीं भूल गयी हूं।
-- अदाजाफरी
यूं जैसे मैं कुछ रख के कहीं भूल गयी हूं।
-- अदाजाफरी
यह बुतों की मुहब्बत भी क्या चीज है।
दिल्लगी-दिल्लगी में खुद मिल गया।।
-- फना कानपुरी
दिल्लगी-दिल्लगी में खुद मिल गया।।
-- फना कानपुरी
खत्म होगा न जिंदगी का सफर।
मौत बस रास्ता बदलती है।।
-- साहिल मानिकपुरी
मौत बस रास्ता बदलती है।।
-- साहिल मानिकपुरी
जैसा नजर आता हूं न ऐसा हूं मैं।
और जैसा समझता हूं न वैसा हूं मैं।।
अपने से भी ऐब हूं छुपाता अपने।
बस मुझको ही मालूम है जैसा हूं मैं।।
-- हाली पानीपती
और जैसा समझता हूं न वैसा हूं मैं।।
अपने से भी ऐब हूं छुपाता अपने।
बस मुझको ही मालूम है जैसा हूं मैं।।
-- हाली पानीपती
दिल है कदमों पर किसी के सिर झुकाया ही न हो।
बंदगी तो अपनी फितरत है, खुदा हो या न हो।।
यह जनूं भी क्या जनूं, यह हाल भी क्या हाल है।
हम कहे जाते हैं, कोई सुन रहा हो या न हो।।
-- जिगर
बंदगी तो अपनी फितरत है, खुदा हो या न हो।।
यह जनूं भी क्या जनूं, यह हाल भी क्या हाल है।
हम कहे जाते हैं, कोई सुन रहा हो या न हो।।
-- जिगर
मुहब्बत में नहीं है फर्क जीने और मरने का,
उसी को देखकर जीते हैं जिस काफिर पे दम निकले।
-- मिर्जा ग़ालिब
उसी को देखकर जीते हैं जिस काफिर पे दम निकले।
-- मिर्जा ग़ालिब
अपनी तबाहियों का मुझे कोई गम नहीं,
तुमने किसी के साथ मुहब्बत निभा तो दी।
-- साहिर लुधियानवी
तुमने किसी के साथ मुहब्बत निभा तो दी।
-- साहिर लुधियानवी
जर्रे-जर्रे में तुझे देखा किया
और मैं जर्रा नवाजी क्या करुं।
-- साजन पेशावरी
और मैं जर्रा नवाजी क्या करुं।
-- साजन पेशावरी
उजाले अपनी यादों के हमारे पास रहने दो,
न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए।
-- बशीर बद्र
न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए।
-- बशीर बद्र
जहां रहेगा वहीं रौशनी लुटाएगा,
किसी चिराग का अपना मकां नहीं होता।
-- वसीम बरेलवी
किसी चिराग का अपना मकां नहीं होता।
-- वसीम बरेलवी
सियासत की अपनी अलग इक जुबान है
लिक्खा हो जो इकरार इनकार उसे पढ़ना।
-- बशीर बद्र
लिक्खा हो जो इकरार इनकार उसे पढ़ना।
-- बशीर बद्र
उम्रे-दराज मांग के लाए थे चार दिन,
दो आरजू में कट गए दो इंतजार में।
-- बहादुर शाह जफर
दो आरजू में कट गए दो इंतजार में।
-- बहादुर शाह जफर
लम्हों की कद्र कीजिए वर्ना ये जिंदगी,
यूं ही गुजर न जाए कहीं धूप-छांव में।
-- नासिर सिद्दीकी
यूं ही गुजर न जाए कहीं धूप-छांव में।
-- नासिर सिद्दीकी
इतना सच बोल के होठों का तबस्सुम न बुझे,
रौशनी खत्म न कर आगे अंधेरा होगा।
-- निदा फ़ाज़ली
रौशनी खत्म न कर आगे अंधेरा होगा।
-- निदा फ़ाज़ली
दुनिया में आदमी को मुश्किल कहां नहीं,
वो कौन सी जमीं है जहां आसमां नहीं।
-- दाग देहलवी
वो कौन सी जमीं है जहां आसमां नहीं।
-- दाग देहलवी






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