प्रतिवर्ष हम रावण को बुराइयों का प्रतीक मानकर जला देते हैं, मगर बुराइयां हैं कि साल दर दर और व्यापक होकर हमारे समक्ष आ खड़ी होती हैं। रावण के दस दसियों सिर फिर से जीवित हो भयंकरअट्टहास करने लगते हैं। आइए देखे आज के समय की दस बड़ी बुराइयां कौन सी हैं जो रावण की तरह सिर उठाए खड़ी हैं।
1. हिंसा - हिंसा के सभी रूप, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष।
2. भ्रष्टाचार - आज हमारे समाज की सबसे बड़ी बुराई या कहे भष्मासुर।
3. दिखावापन - दिखावेपन की पतित प्रतिस्पर्धा।
4. नारी उत्पीड़न - महिलाओं के प्रति अत्याचार और दुर्भावना।
5. अंधविश्वास - विज्ञान की खूब तरक्की फिर भी अन्धविश्वास हावी।
6. बाजारवाद - पर्व परम्परा सब पर बाजारवाद हावी।
7. स्वार्थपरता - आज का इंसान अपने स्वार्थ के लिए कुछ भी बुरे कर्म करने उतारू है।
8. पर्यावरणीय क्षति - अपने निजी स्वार्थ और सुख सुविधाओं के लिए पर्यावरण का शोषण।
9. साम्प्रदायिकता - आज देश इस कोयले की ढ़ेर पर बैठा है।
10. लालच - जल्द से जल्द धनवान बनने की कुत्सित मनोवृत्ति।
यदि सचमुच में हमें भारत को राम राज्य बनाना है तो हम सभी को मिलकर समाज में पनप रहे इन रावणीय सोच व विकारों को खत्म करने का गम्भीरता से प्रयास करना चाहिए।
1. हिंसा - हिंसा के सभी रूप, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष।
2. भ्रष्टाचार - आज हमारे समाज की सबसे बड़ी बुराई या कहे भष्मासुर।
3. दिखावापन - दिखावेपन की पतित प्रतिस्पर्धा।
4. नारी उत्पीड़न - महिलाओं के प्रति अत्याचार और दुर्भावना।
5. अंधविश्वास - विज्ञान की खूब तरक्की फिर भी अन्धविश्वास हावी।
6. बाजारवाद - पर्व परम्परा सब पर बाजारवाद हावी।
7. स्वार्थपरता - आज का इंसान अपने स्वार्थ के लिए कुछ भी बुरे कर्म करने उतारू है।
8. पर्यावरणीय क्षति - अपने निजी स्वार्थ और सुख सुविधाओं के लिए पर्यावरण का शोषण।
9. साम्प्रदायिकता - आज देश इस कोयले की ढ़ेर पर बैठा है।
10. लालच - जल्द से जल्द धनवान बनने की कुत्सित मनोवृत्ति।
यदि सचमुच में हमें भारत को राम राज्य बनाना है तो हम सभी को मिलकर समाज में पनप रहे इन रावणीय सोच व विकारों को खत्म करने का गम्भीरता से प्रयास करना चाहिए।
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