आप सभी को हमारी संस्कृति और हम सभी के रोम रोम में व्याप्त, सर्वगुण सम्पन्न भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिन की अशेष अनंत मंगलकामनाएं.....
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन ।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि ॥
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि ॥
-- (श्रीमदभगवद्गीता -२.४७)
अर्थ : तेरा कर्म करनेमें ही अधिकार है, उसके फलोंमें कभी नहीं । इसलिए तू कर्मों के फल हेतु मत हो तथा तेरी कर्म न करने में भी आसक्ति न हो ॥
अर्थ : तेरा कर्म करनेमें ही अधिकार है, उसके फलोंमें कभी नहीं । इसलिए तू कर्मों के फल हेतु मत हो तथा तेरी कर्म न करने में भी आसक्ति न हो ॥


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