Protect yourself from Typhoid
टाइफाइड एक भयानक संक्रामक रोग है। आज से करीब 70 पहले इस महामारी से हजारों लोग मर जाते थे, पर अब नई-नई दवाइयों के अविष्कार और विकास से इस पर काबू पा लिया गया है। टाइफाइड एक प्रकार के जीवाणु से फैलता है।
आयुर्विज्ञान की भाषा में इसे बैसिलस सेलमोनेला टायफोसा कहते हैं। यह गंदे भोजन या गंदे पानी के साथ शरीर में प्रवेश कर खून तक पहुंच जाता है। यह खून को प्रभावित करके पूरी रक्त व्यवस्था को दूषित कर देता है।इस बीमारी में बुखार, खांसी, खाल का उधड़ना, तिल्ली का बढ़ जाना और सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या में कमी हो जाना आदि होता है। इस बीमारी में भूख भी कम लगती है और लगातार बुखार रहता है।
टाइफाइड की जितनी भी महामारियां फैली, उनमें से अधिकांश कुएं, तालाब आदि के पानी के दूषित होने से फैलीं।टाइफाइड के जीवाणु पकने से पहले भोजन सामग्री में भी वाहक द्वारा पहुंच सकते हैं। मक्खियां भी इन जीवाणुओं को इधर से उधर पहुंचाती हैं। टाइफाइड की बीमारी ठीक हो जाने के बाद भी शरीर में ये जीवाणु बचे रह जाते हैं।
टाइफाइड की जांच के लिए विडेल टेस्ट किया जाता है। इसमें खून की जांच की जाती है।
टाइफाइड एक भयानक संक्रामक रोग है। आज से करीब 70 पहले इस महामारी से हजारों लोग मर जाते थे, पर अब नई-नई दवाइयों के अविष्कार और विकास से इस पर काबू पा लिया गया है। टाइफाइड एक प्रकार के जीवाणु से फैलता है।
आयुर्विज्ञान की भाषा में इसे बैसिलस सेलमोनेला टायफोसा कहते हैं। यह गंदे भोजन या गंदे पानी के साथ शरीर में प्रवेश कर खून तक पहुंच जाता है। यह खून को प्रभावित करके पूरी रक्त व्यवस्था को दूषित कर देता है।इस बीमारी में बुखार, खांसी, खाल का उधड़ना, तिल्ली का बढ़ जाना और सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या में कमी हो जाना आदि होता है। इस बीमारी में भूख भी कम लगती है और लगातार बुखार रहता है।
टाइफाइड की जितनी भी महामारियां फैली, उनमें से अधिकांश कुएं, तालाब आदि के पानी के दूषित होने से फैलीं।टाइफाइड के जीवाणु पकने से पहले भोजन सामग्री में भी वाहक द्वारा पहुंच सकते हैं। मक्खियां भी इन जीवाणुओं को इधर से उधर पहुंचाती हैं। टाइफाइड की बीमारी ठीक हो जाने के बाद भी शरीर में ये जीवाणु बचे रह जाते हैं।
टाइफाइड की जांच के लिए विडेल टेस्ट किया जाता है। इसमें खून की जांच की जाती है।
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